Impact of Corona Virus and Imagination of a Poet

कोरोना – तेरी ऐसी तैसी

विद्यालय बंद, महाविद्यालय बंद, विश्वविद्यालय बंद,
पार्क बंद, कसीनो बंद, हार्स रेसिंग बंद, माल बंद,
खेल बंद, पार्टियां बंद, कवि सम्मेलन बंद,
कंसर्ट बंद, शो बंद, फ़ैशन शो बंद, होटल बंद,
बार बंद, व्यापार बंद, बाजार बंद…

अब और क्या-क्या बंद करवायेगा रे कोरोना?
इंसान को इंसान से कितना लड़वायेगा रे कोरोना?
चीन की अमेरिका से दुश्मनी करवायगा रे कोरोना?
हमारी दुनिया को मुर्दों की दुनिया बनवायगा रे कोरोन?,

तो सुन ले तू ऐसा कर ना पायेगा कोरोना,
जिंदगी पर मौत की फ़तह कर ना पायेगा कोरोना|

बेहतर यही है कि लौट जा जहां से आया है कोरोना,
जा उसी के पास जिसकी माया है कोरोना,
बहुत जल्द तेरा भी इलाज निकल आयेगा रे कोरोना
इंसान तुझ पर भी जंग जीत जायगा रे कोरोना

और सुन आखिरी बात –
डरावनी शक्लें बनायी हैं तूने कैसी-कैसी,
भयावह स्थितियां बनायी हैं तूने जैसी-जैसी,
इंसान की फ़ितरत को न समझना ऐसी-वैसी,
सुन कोरोना, इंसान ही करेगा तेरी ऐसी-तैसी।

कोरोना – तेरी ऐसी तैसी, कोरोना – तेरी ऐसी तैसी

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